गुरुवार, 31 जुलाई 2014

पहचान की बाधा

मनुष्य द्वारा अपने अंदर विद्यमान परम् सत्य की छाया की पहचान उसे नहीं मिल पाती है । इस अल्पता का मुख्य कारण (1) उसकी प्रकृतीय गुणों के प्रति मोंह (2) इंद्रीय वासनाओं के भोग की कामना (3) अपने अंदर विद्यमान परम् सत्य की छाया के प्रति अचेत मस्तिष्क की दशा (4) इच्छाजनित कार्यों को करने का अभ्यास होता है । इसलिये यदि कोई जीवन की चर्मोत्कर्ष उत्कृष्ठ आनंद स्थिति को अनुभव करने और उसी आनन्द की स्थिति को अपने जीवन का सत्य स्वरूप /-ा*े*-ो*-9999999े-्+ट होना चाहे तो उसे उपरोक्त चार बाधाओं को विजय करना लक्ष्य करना होगा । बाधाओं के हटने पर परम् सत्य का दर्शन आपको अपने अंदर मिल जावेगा ।+-+* 

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