मुक्त आत्मा परम् सत्य की शक्ति
द्वारा परम् सत्य के प्रयोजन के कार्यों को करता है । वह परम् सत्य की अनुभूति में
सदैव हर्षित रहता है । वह परम् सत्य की शक्ति और उर्जा से ओतप्रोत हर्षित मन सेवा
में तत्पर रहता है । उसके व्यक्तित्व में द्वैत में विभाजित निष्ठा पूर्णरूप से
लुप्त हो जाती है । वह चेतन, अर्धचेतन, तथा अचेतन की प्रत्येक अवस्थाओं में परम् सत्य की
अनुभूति को ही प्रगट करता है । वह परम् सत्य की अनुभूति व उर्जा द्वारा सदैव हर्ष
उल्लास की दशा में परम् सत्य के ज्ञान से प्रकाशित होता है । उसका जीवन मानो परम्
सत्य का ही प्रगट स्वरूप बन जाता है ।
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