रविवार, 27 जुलाई 2014

रचना का विज्ञान

समस्त प्रकृतीय रचना में निहित विज्ञान ही इस समस्त संसार के स्वरूप, गति, गंतव्य का श्रोत है । यह अद्भुद विज्ञान ही प्रेरक आत्मा को बाँधे हुये भी है । उसकी सेवा के सहारे समस्त कर्मों को सम्पादित भी कराता है । जबकि आत्मा प्रकृति का शासक है । प्रकृति के ग़ुण ही प्रकृति की शक्ति है । इन्ही गुणों के मोंह में पडकर आत्मा शासक होते हुये भी दास बनकर रह जाता है । यह समस्त मात्र रचना के विज्ञान के प्रभाव से सम्भव हो जाता है । इसीलिये यदि प्रकृति के मोंह की जेल से  शासक आत्मा को मुक्त कराना है तो (1) या तो आत्मा, प्रकृति और मोंह तीनो के ज्ञाता बनिये (2) या प्रकृति को आत्मसमर्पण करिये (3) या नियंत्रित कर्म करिये । आत्मा मोंह से मुक्त हुये बिना और अधिक मोंह में बँधता ही जायेगा । कोई दूसरा विकल्प है ही नहीं । अंधकार का नाश प्रकाश से ही सम्भव है । कोई दूसरा उपाय नही होता है ।  

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