शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

मुक्त जीवन

मुक्त आत्मा के धारक का जीवन मस्तिष्क और शरीर उस परम् सत्य की अनुभूति द्वारा मोंह के आच्छादन से पूर्ण मुक्त एक ज्योति के समान सत्य से प्रकाशित आभा के रूप में प्रगट होता है । उसका व्यक्तित्व का चर्मोत्कर्ष उत्कर्ष जिसमें हर्ष की मुद्रा स्वतंत्र अभिव्यक्ति किसी भी कलुषता के कलंक से रहित उत्कृष्टतम स्वरूप उदय होता है । वह मानों अपनी उपलब्धि को समस्त मानव समाज में वितरित कर देना चाहता है । उसका जीवन एक प्रतीक स्वरूप हो जाता है जिसे देख हर मोंह में आसक्त व्यक्ति प्रेरणा ग्रहण करे कि मुक्त जीवन ही आदर्श जीवन रूप है जिसे पाने के लिये हर सम्भव प्रयत्न किया जाय । 

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