हम सभी का कर्म फल की कामना से
कर्म करने का अभ्यास बना हुआ है । परंतु जिस पल हम कर्म को कर्म फल की कामना के
बगैर करना शुरू करते हैं तत्काल ही अनुभव आता है कि हम जैसे चिर प्रतीक्षित सही पथ
को पा गये हैं । मानो अपने अंदर विद्यमान आत्मा की अनुभूति इन्ही इच्छा जनित कर्मों
द्वारा ही ढकी हुई थी । फल की कामना के भ्रम में किये जाने वाले कर्म हमें अपने
अंदर विद्यमान परम् सत्य के अंश आत्मा के अपने अनुभव को हमसे दूर किये रहते हैं ।
इस अनुभूति के ना होने से हम अपने सत्य स्वरूप से ही अनभिज्ञ रहते हैं । इस प्रकार
आत्मा का अनुभव पाने के लिये हमारे लिये सरलतम उपाय है कि हम कर्मफल की इच्छा के
बिना ही कर्म करने का अभ्यास सृजित करें ।
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