अपने अस्तित्व की सही पहचान में
बाधक मोंह और आसक्ति से मुक्ति हेतु सुझाये गये मार्ग भक्ति अथवा कर्म को अपनाना
होगा । भक्ति समर्पण है । कर्म आत्मविश्वास है । जिसे जो अनुकूल प्रतीत हो वह उसे
अपनावे । परिणाम दोनो ही पथ से एक ही मिलेगा । मोंह और आसक्ति से मुक्ति । भक्ति
अथवा कर्म ये आपकी आत्मा का स्वरूप नहीं हैं । परंतु मोंह और आसक्ति से ग्रसित
आत्मा की मुक्ति के पथ हैं साधन हैं । व्याधियों से मुक्त हो जाने पर आत्मा अपने
ईश्वरीय गुणों को प्रगट करेगी । उस शाश्वत् रूप के प्रकाश से व्यक्तित्व का नया
उत्कृष्ट परिचय प्रगट होगा ।
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