शनिवार, 5 जुलाई 2014

साकार ब्रम्ह प्रकृति

परम् सत्य निर्गुण, निर्विकार, निर्लिप्त, चिर, दिव्य शांत स्वत: अस्तित्व है । प्रकृति उसकी रचना है । प्रकृति के रूप में परम् सत्य ने अपने को प्रगट किया है । सामान्य मनुष्य के लिये प्रकृति ही परम् सत्य का प्रगट ब्रम्ह स्वरूप है । इसी प्रकार मुक्त आत्मा आनंद से ओतप्रोत शांत भाव से कार्य में संलग्न होती है । उसे अलग अस्तित्व की कोई कामना नहीं होती है परंतु फिर भी वह एक अलग स्वरूप में परम् सत्य का प्रतिनिधित्व करती है । उसका अपना कोई प्रयोजन नहीं होता है फिर भी वह कार्य करती है । परम् सत्य की हमारे अपने अंदर उपस्थिति को किसी ज्ञानेंद्रिय के माध्यम से नहीं जाना जा सकता है परंतु अनुभव किया जा सकता है । 

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