बुधवार, 23 जुलाई 2014

निरंकार

जल के समुद्र में डूबे रहिये परंतु जल से अछूता रहिये । आत्मा प्रकृति के मध्य में रहे परंतु प्रकृति से अछूता रहे । निरंकार । भगवान शंकर को निरंकार बताया जाता है । माता पार्वती तो सदैव उनके साथ रहती हैं । उनके दो पुत्र भी बताये जाते हैं । परंतु निरंकार की श्रेणी में वह शिरोमणि माने जाते हैं । यह ऐसा concept है जो कि यदि समझ में आ जाय तो मानो सर्व ज्ञान मिल गया । प्रकृति में रखा गया । प्रकृति के गुणों का भोक्ता बनाया गया । यह सब मनुष्य ने स्वयं तो रचा नहीं । यह तो ब्रम्ह ने ही रचा । -परंतु अपेक्षा भी रखी । निरंकार । प्रकृति में रहना । प्रकृति के गुणों का भोग भी करना । परंतु प्रकृति से अछूता रहना । जो इस रहस्य को समझ सके । वही ज्ञानी । जो इस रहस्य को अपने जीवन में जी सके । वही आनंद को जाने । निरंकार । भगवान के शहस्त्र नाम । फिर भी निरंकार । भक्त निरंकार । 

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