इस संसार से मुक्त । आत्मा जब मोंह
से मुक्त हो जाय । इस संसार के साथ बँधा है मनुष्य इसी मोंह के द्वारा । मोंह से
मुक्त आत्मा कैवल्य । लोकातीत परम् सत्य की स्थिति तक पहुँचना है मोंह से मुक्त
आत्मा का अनुभव । मोंह से मुक्ति की स्थिति में द्वैत स्वत: समाप्त हो जाता है ।
मोंह से मुक्त आत्मा का परम् सत्य के साथ एकीकरण हो जाता है । इस स्थिति में
प्रकृतीय गुणों की आसक्ति समाप्त हो जाती है । मुक्त स्वतंत्र आत्मा शांति की
अनुभूति करता है । मुक्त आत्मा संसार के प्रक्रियाँओं में संलग्न होती है परंतु
उनमें लिप्त नहीं होती है ।
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