अज्ञान ही बंधन है । सत्य स्थिति
का ज्ञान ना होना अज्ञान है । अज्ञान के प्रभाव से बंधन होता है । मोंह में बंधन ।
उपरोक्त समस्त का विलोम । सत्य स्थिति की जानकारी होना ही ज्ञान है । ज्ञान का प्रादुर्भाव ही अज्ञान का नाश है ।
अज्ञान के नाश से सम्भव होगी मुक्ति । मोंह से मुक्ति । सत्य एक ही है । उस सत्य
को समर्पित होना ही मुक्ति है । प्रत्येक कर्म को उसी सत्य को समर्पित कर करें ।
प्रत्येक कर्म को उसी सत्य की सेवा समझ कर करे । प्रत्येक कर्म को उसी सत्य का
आदेश रूप में ग्रहण कर करें । यही अभ्यास मुक्ति का पथ है ।
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