रविवार, 1 जून 2014

व्याधि और निदान

यदि कंचिद किसी कार्य करने की पद्धति से शत्रुता है तो यह शत्रुता कार्य से नहीं है अपितु कार्य द्वारा निर्वाण उपलब्ध करने की प्रक्रिया से है । सत्य का ज्ञान पाने के लिये सत्य स्थिति से अनभिज्ञता सबसे प्रबल शत्रु होता है । अज्ञान यदि कंचिद मूल व्याधि है तो इस व्याधि का एकमात्र सरताज इलाज़ ज्ञान है । अपरिवर्तनीय सत्य का ज्ञान परिवर्तनशील कार्य द्वारा नहीं सम्भव हो सकता है । सही मन:दशा द्वारा कर्म के अभ्यास द्वारा सत्य के ज्ञान का आधार निर्मित होता है।  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें