रविवार, 18 मई 2014

प्रपत्ति ज्ञानरूप

मनुष्य के अंदर विद्यमान परम् सत्य की छाया का बोध ज्ञान है । भक्ति ज्ञान को पाने का मार्ग प्रशस्थ करती है । जब भक्ति प्रज्वलित होती है तो मनुष्य के अंदर विद्यमान आत्मा का उज्जवल प्रकाश भक्त को ज्ञान से प्रकाशित करता है । भक्त अपने अंदर परम् सत्य को विद्यमान अनुभव करता है और अपने को परम् सत्य के अंदर निवास करता हुआ अनुभव करता है । भक्त परम् सत्य के साथ सम्बद्ध अनुभव करता है । भक्त प्रहलाद कहते हैं कि मनुष्य के लिये उच्चतम आदर्श स्थिति है कि वह परम् सत्य को पूर्णरूप से निक्षावर हो जाय । इसी भावना को पोषित करते हुये प्रपत्ति ज्ञान का प्रगट रूप है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें