सोमवार, 28 अप्रैल 2014

सत् चित आनंद

परम् सत्य को बताया गया है सत् चित आनंद । सत् वास्तविक । चित सत्य । आनंद आनंदमय । ब्रम्ह का अनुभव प्राप्त होगा जो कि वास्तविक अनुभव होगा । इसके विपरीत होता है भ्रामक अनुभव । जो कि प्रतीत होता है परंतु वास्तविकता में उस स्वरूप में होता नहीं है । प्रकृतीय मोंह से मिलने वाला सुख । यह सत् नहीं होता । प्रारम्भ में प्रतीत होता है कि यह सुख है । परंतु अंत में वह दु:ख का कारण बनता है । इसके विपरीत ब्रम्ह के दर्शन से मिलने वाला सुख वास्तविक सुख होता है । समय के व्यतीत होने परभी वह सुख ही रहेगा । परम् सत्य को लक्ष्य कर प्रयत्नशील जिज्ञासुओं के सज्ञान के लिये यह लक्षण बताये गये हैं । इन लक्षणों से तुलना करके प्रयत्नशील साधक को अपने प्रयत्नों की सार्थकता को परीक्षित करना होगा । परम् सत्य का जो अनुभव प्राप्त होगा वह वास्तविक अनुभव होगा, समय के साथ परिवर्तित होने वाला नहीं होगा, और प्रत्येक रूप में वह आनंदमय होगा ।  

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