युज शब्द धातु है । इसका अर्थ होता है । बाँधना । इस शब्द
से बना योग । मनुष्य की मानसिक शक्ति को बाँधना । इस मानसिक शक्ति को संतुलित करना
। इस मानसिक शक्ति को और अधिक विकसित करना । मनुष्य के समस्त कार्य सामर्थ्य को
मस्तिष्क की शक्ति के माध्यम से सुनियोजित करना । उसे कार्य में प्रयोग के लिये
एकाग्र करना ।
योग द्वारा अर्जित शक्ति के सन्यमित प्रयोग द्वारा विकसित
होगा एक ऐसा व्यक्तित्व जोकि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठ पारलौकिक प्रतिभा से
युक्त होगा । मनुष्य की आत्मा प्रकृतीय मोंह के बंधन से मुक्त होकर एक विकसित
सुहृद मानवीय गुणों से युक्त व्यक्तित्व में पर्णित होगी उपरोक्त समस्त परिवर्तन सम्भव होगा भारतीय धर्मदर्शन द्वारा
सुझाये गये योगशास्त्र का अनुशरण करने के फलस्वरूप । योगशास्त्र में सुझायी गयी
विभिन्न विधायें प्रयोगकाल में तो भिन्न प्रतीत होंगी परंतु इनके प्रयोग द्वारा
उपलब्ध होने वाले अंतिम परिणाम की अनुभूति प्रत्येक विधा की एक ही होगी ।
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